पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत मिलने वाला चावल की कालाबाजारी करते हुए कोतवाली पुलिस पकड़ चुकी है पिकअप,ट्रैक्टर ट्रॉली गरीबों के राशन से मुनाफाखोरी, 10 रुपए में खरीदकर 22 रुपए में बेच रहे

पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत मिलने वाला चावल की कालाबाजारी करते हुए कोतवाली पुलिस  पकड़ चुकी है पिकअप,ट्रैक्टर ट्रॉली  गरीबों के राशन से मुनाफाखोरी, 10 रुपए में खरीदकर 22 रुपए में बेच रहे

रायसेन।गरीबों को राशन दुकानों से मिलने वाले सस्ते अनाज गेंहू चावल उनके निवाले को बाजार में ऊंचे दामों पर कालाबाजारी कर रहे हैं।पूर्व में पिछले 2-3सालों में जिला मुख्यालय के कोतवाली पुलिस ने एक ट्रैक्टर ट्राली और पिकअप पकड़ी थी।इससे साफ जाहिर होता है कि गरीबों का निवाला मुंह से छीनकर कालाबाजारी की भेंट चढ़ा देते हैं पीडीएस संचालक।

केस-01- थाना कोतवाली पुलिस ने पीडीएस के चावल से भरा पिकअप वाहन माखनी की राशन डीलर का पकड़ा था। जिसमें 50 हजार कीमत का 20 क्विंटल चावल भरा हुआ था। इसे राशन दुकानदार खुद माखनी से रायसेन में बेचने ले जाया जा रहा था। मौके से वाहन चालक को गिरफ्तार कर पूरा माल जब्त कर लिया गया था।बाद में राशन घोटाले की ऑनलाइन इंट्री नहीं होती थी।इस मामले को जांच के नाम पर पेंडिंग कर सारा मामला कोतवाली पुलिस ने बाद में रफादफा कर दिया था।

केस-02-गुलगांव राशन दुकान से पहले ट्रैक्टर ट्रॉली में लोडिंग कर दुकानदार 13 क्विंटल गेंहू सांची में एक अनाज व्यापारी के यहां बेचने लाया।मुखबिर की सूचना पर सांची पुलिस ने भी राशन दुकानदार और अनाज कारोबारी को पकड़ा था।इस पुलिस की छापामार कार्यवाही से काफी हड़कंप मचा।फिर वह कालाबाजारी के केस को भी राजनैतिक एप्रोच के दम पर रफादफा कर दिया गया।

दरअसल सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के तहत गरीबों को बांटा जाने वाला चावल कुछ मुनाफाखोरों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुका है। दुकानों से सांठ-गांठकर दलाल इसे खरीद रहे हैं। वहीं कुछ उपभोक्ता भी चावल को बाजार में बेच रहे हैं। इसी का बड़े पैमाने पर फायदा मुनाफाखोर उठा रहे हैं। वह गरीबों से 10 रुपए किलों में चावल लेकर उसे 22 से 25 रुपए तक में खपा रहे हैं।

      जिम्मेदार विभाग के अफसरों की लापरवाही आलम यह है कि जिला मुख्यालय पर कहीं दिनदहाड़े तो कहीं रात में यह व्यापारी पिकअप और मिनी ट्रकों के जरिए राजधानी भोपाल भिजवा रहे हैं।इसमें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को मुफ्त में मिलने वाला चावल सस्ता गेंहू की ट्रांसपोटिंग धड़ल्ले से की जा रही है।

    कभी कभार सस्ते अनाज की कालाबाजारी के मामले जिलेभर में सामने आते हैं। इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उचित मूल्य की दुकान पर मिलने वाला चावल इतनी ज्यादा मात्रा में कैसे दलालों तक पहुंच जाता है ? जिला आपूर्ति अधिकारी आरएम सिंह का कहना है कि उचित मूल्य दुकान से कालाबाजारी नहीं हो रही है। यह तो उपभोक्ताओं द्वारा बेचा जा है। इस तरह का मामला सामने आने के बाद जांच होना चाहिए। आखिर पकड़े गए वाहन चालक ने कहां से चावल खरीदा है। इसके बाद ही कड़ी से कड़ी जुड़ पाएगी। लेकिन फिलहाल अब देखने में आ रहा है कि पुलिस एफआईआर के बाद आगे की जांच-पड़ताल नहीं करती है। क्योंकि पूर्व में भी ऐसी ही दलालों से चावल गेंहू बाजरा जब्त किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि उपभोक्ताओं से चावल खरीदने के लिए दलाल सक्रिय हैं। वह 10 से 20 रुपए किलों में इसकी खरीदी करते हैं और इसे फिर महंगे दामों को खपा देते हैं। गरीबों का चावल 10 में खरीदकर दुगने से ज्यादा भावों में बेचा जाता है। वहीं कुछ उपभोक्ता तो राशन दुकान संचालक को चावल बेच देते हैं और इसके बदले में पैसे ले लेते हैं। फिर पीडीएस संचालक इसे अपने हिसाब से खपा देता हैं।