एकल खिड़की मंडीदीप में सिमट कर रह गया जिले का श्रम विभाग

एकल खिड़की मंडीदीप में सिमट कर रह गया जिले का श्रम विभाग

रायसेन। जिले में संचालित हो रहा श्रम विभाग का कार्यालय केवल मात्र मंडीदीप की एकल खिड़की प्रणाली में सिमट कर रह गया है। बताया जाता है कि जिले के नाम से श्रम विभाग संचालित तो हो रहा है परन्तु श्रम विभाग कार्यालय मंडीदीप को बनाया गया है। इस श्रम विभाग में कहने को तो एक जिला अधिकारी के साथ 5 श्रम निरीक्षक के अलावा 2 कम्प्यूटर आपरेटर और चर्तुर्थ श्रेणी कर्मचारी की पद् स्थापना मध्यप्रदेश शासन के द्वारा की गई है। जिले में संचालित हो रहे उद्योगों के साथ अन्य निर्माण कार्यों में कार्यरत मजदूरों की समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना और श्रम विभाग की जो भी मजदूरों के हित बाली योजनाओं से उनको लाभान्वित कराना श्रम विभाग की प्राथमिकता में रखा गया है परन्तु जिले में कहने को तो सहतगंज चिकलोद के अलावा कई प्रकार की राइसमिलों में कार्यरत मजदूरों के हितों को नजर अंदाज करते हुए। श्रम विभाग केवल मंडीदीप के इंडस्ट्रीज ऐरिया के मजदूरों को लाभ प्रदान कराने के उददेश्य से एकल खिड़की प्रणाली से लाभ प्रदान कराना सुनिश्चित कर रहे है। जिस कारण श्रम विभाग पूरे जिले में केवल जनपद पंचायतों नगर पंचायतों के भरोसे संचालित हो रहा है। जिस कारण मंडीदीप की फैक्ट्रियों में अधिकांश मजदूर ठेकेदारी प्रणाली के तहत कार्य करते हैं। और यह मजदूर मध्यप्रदेश के कम और विहार और अन्य राज्यों के ज्यादा मजदूरी कर रहे है। इनकी समस्याओं को प्राथमिकता प्रदान करते हुए। श्रम विभाग के अधिकारी मंडीदीप से जिले के अन्य तहसीलों और जिला

मुख्यालय पर बैठना उचित नहीं समझते जिस कारण जिले में श्रम विभाग केवल औपचारिकता बाला विभाग रह गया हैं। जबकि कलेक्टर रायसेन के द्वारा जिला पंचायत कार्यालय रायसेन में एक श्रम निरीक्षक की तैनाती के आदेश दिये गये थे। परन्तु कलेक्टर के आदेश श्रम विभाग मानने को तैयार नहीं हैं और श्रम निरीक्षक हमेशा जिला पंचायत कार्यालय से नदारत रहते है। और श्रम विभाग की उपस्थिति के लिए कोई भी कर्मचारी की तैनाती श्रम विभाग ने नहीं की गई है। एक मात्र अतीक मोहम्मद श्रम विभाग के नाम पर विराजमान तो है परन्तु श्रम निरीक्षक के बिना श्रम विभाग का कार्य अधूरा रहता है। और जन सुन सुनवाई और कलेक्टर के पास मजदूर श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ प्रदान करने पहुँचते है तो उनके आवेदनों को लेना और उनका निराकरण करने के लिए श्रम निरीक्षक नदारत रहते है। ऐसे में जिले में श्रम विभाग की पद स्थापना का उददेश्य और योजनाओं का लाभ श्रमिकों को नसीब नहीं हो पाता अब देखना है कि जिले के कलेक्टर इस दिशा में क्या निर्णय लेते हैं यह चर्चा और जांच का विषय बना हुआ है।