शिकायत के बाद भी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे रहा ध्यान पुरानी बस्ती इलाके में बंदरों का घरों पर कब्जा, लोग परेशान,बच्चों को।नाखूनों से कर देते हैं जख्मी

शिकायत के बाद भी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे रहा ध्यान पुरानी बस्ती इलाके में बंदरों का घरों पर कब्जा, लोग परेशान,बच्चों को।नाखूनों से कर देते हैं जख्मी

रायसेन। इन दिनों रायसेन शहर से लेकर ग्रामीण अंचल में लाल काले मुंह बंदरों का आतंक बरपाया है। लाल मुंह बंदर झुंड के रूप में वन और रायसेन किले को क् छोड़कर पुरानी बस्ती इलाके में आ गए हैं। लाल मुंह बंदरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि अलग-अलग समूह बनाकर घरों की छत से लेकर मुख्य द्वार तथा दो पहिया व चार पहिया वाहनों पर जाकर कई घंटे तक बैठे रहते हैं।

वर्तमान में बंदरों की सबसे ज्यादा समस्या शहर के नरापुरा तिपट्टा बाजार काली टोल मोहल्ला मढ़ई पुरा फ़ौजदार मोहल्ला क्षेत्र में है। इसी तरह कलेक्ट्रेट कार्यालय वीआईपी कॉलोनी शीतल सिटी गोल्डन सिटी कॉलोनी जहां बड़ी संख्या में पेड़ लगे हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में काले मुंह के बंदरों का बड़ा जमावड़ा है। यहीं से बंदर समूह के रूप में पास स्थ

इन कॉलोनियों में घरों उनकी छतों पर जाकर बैठ जाते हैं। चूंकि इन दिनों सर्दी का मौसम है इसलिए लोग ठंड से बचने धूप लेने के लिए छतों पर जाते हैं लेकिन खूंखार बंदरों की वजह से छत पर भी नहीं जा पा रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि बंदरों की धमाचौकड़ी केवल छत तक ही सीमित नहीं है ।बल्कि घर के मुख्य द्वार, परिसर में रखे वाहनों पर भी बैठ जाते हैं। परिवार के सदस्य जब इन्हें भगाने का प्रयास करते हैं तो यह बंदर झुंड में हमला बोलने में भी पीछे नहीं रहते। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि बंदरों से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को खतरा ज्यादा है। आशंका रहती है कि बंदरों के हमले से बचने के चक्कर में परिवार का कोई सदस्य छत या सीढ़ियों से न गिर जाएं। इस तरह की घटना बीते साल जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्राम नरवर खण्डेरा में हो चुकी है। जब एक सरकारी शिक्षक के पिता बंदर के हमले से बचने छत से नीचे गिर गए। इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

बंदरों के उत्पात से लोग परेशान...

रायसेन शहर की पुरानी बस्ती के लोग लाल रंग के बंदरों की धमाचौकड़ी से बेहदपरेशान हैं।वार्ड 3 फौजदार पुरा निवासी आरिफ खान हनीफ खान झंकार, इरफान अली ने बताया कि बंदरों के झुंड घर की छतों से सीढ़ी के सहारे घरों के अंदर रखी खाद्य पदार्थों सामग्री खा जाते हैं।घर के सदस्य जब इन्हें भगाते हैं तो वह दांत दिखाते हुए पीछे पड़ जाते हैं।इसी तरह अंजुम कमाल आबिद अली मुईन उल्लाह खान असलम खान ज्योति सेन, रामकली देवी ने बताया कि बन्दरों को पकड़कर उन्हें जंगल क्षेत्रों में छोड़ा जाए।ताकि लोगों को बन्दरों के आतंक से निजात मिल सके।पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर मोहन लाल मीणा और डीएफओ की मदद से मथुरा की बन्दर पकड़ो टीम की मदद से बन्दरों को।पकड़ उन्हें पिंजरों में कैद कर जंगलों में छुड़वा दिया था।नागरिकों ने कलेक्टर अरविंद दुबे से बन्दरों को टीम से पकड़वाकर इनसे मुक्ति दिलाई जाने की भी मांग की है।

कॉलोनीवासियों ने बताया कि रिहायशी इलाके में बंदरों की समस्या काफी पुरानी है। उन्होंने कहा कि न तो पंचायत इस ओर ध्यान देती है और न ही वन विभाग। वर्तमान में ग्रामीण बंदरों से जान माल की सुरक्षा खुद ही कर रहे हैं। गोल्डन सिटी कालोनी के रहने वाले हिम्मत सिंह यादव, रवि शंकर पप्पू यादव ने बताया कि पूरी कॉलोनी में बंदरों का आतंक है। इनकी वजह से छोटे बच्चे तो क्या बड़े भी छत पर नहीं जा पाते। महिलाएं कपड़े सुखाने तक नहीं जा पाती। यदि डरते हुए किसी तरह कपड़े छत पर डाल दिए तो कुछ कपड़े ही गायब मिलते हैं।