भाजपा ने उदयपुरा में खेला युवा पर दांव तो साँची में कांग्रेस की उलझी गुत्थी,उदयपुरा सीट से बीजेपी ने नया चेहरा उतारकर चौंकाया

भाजपा ने उदयपुरा में खेला युवा पर दांव तो साँची में कांग्रेस की उलझी गुत्थी,उदयपुरा सीट से बीजेपी ने नया चेहरा उतारकर चौंकाया

रायसेन. आगामी मिशन 2023 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है।भाजपा कांग्रेस आप सहित अन्य राजनीतिक दलों द्वारा तैयारियां तेज कर दी है।जहां भाजपा जन आशीर्वाद यात्राएं निकाल कर मतदाताओं के बीच पहुंच चुकी है।वहीं कांग्रेस जन आक्रोश यात्राएं जिले की चारों विधानसभाओं में निकालकर वोटरों के बीच पहुंचेगी।2023के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर कांग्रेस से भाजपा ने बाजी मार ली है।की। इस सूची ने प्रदेश के साथ जिले की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। तीन-तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित केंद्रीय नेताओं और सांसदों बके नाम दूसरी सूची में शामिल होने से आगामी समय में प्रदेश की राजनीति और रायसेन जिले की उदयपुरा सीट से युवा को प्रत्याशी नरेंद्र शिवाजी पटेल घोषित करने से जिले की राजनीति की दिशा भी नजर आने लगी है।इस बार भाजपा की ओर से पुराने प्रत्याशी पूर्व विधायक रामकिशन पटेल कोटपार पर दांव न खेलकर किरार समाज बाहुल्य इस उदयपुरा सीट से एकदम नये चेहरे नरेंद्र शिवाजी पटेल के नाम पर मुहर लगाई है।नरेंद्र पटेल किरार समाज के हैं।कांग्रेस से वर्तमान कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल गडरवास को एक बार फिर से भरोसा जताकर उम्मीदवार बनाती है तो जीत की राह आसान हो सकती है।क्योंकि यहां पुरविया ठाकुर बहुल क्षेत्र होने के नाते ठाकुर समाज का रुख कांग्रेस की तरफ हो सकता है।वास्तव में देवेंद्र पटेल की बेदाग छवि उनकी कार्यशैली मतदाताओं के बीच गहरी पैठ है।इसके अलावा कांग्रेस से नरेंद्र बाबू पटेल, राजेश पटेल होशियार सिंह ठाकुर के नाम टिकट की दौड़ में शामिल हैं।

जिले की चार विधानसभाओं में आगामी दिनों में राजनीति किस दिशा में मुड़ेगी इसके कयास लगने लगे हैं। सबसे रोचक और कशमकश की स्थिति भोजपुर और उदयपुरा में ही है। भोजपुर से इस बार भाजपा से विधायक सुरेंद्र पटवा, जोधा सिंह अटवाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के नाम उम्मीदवार बनाने चल रहे हैं।वहीं कांग्रेस पार्टी से भोजपुर सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व शिक्षा मंत्री राजकुमार पटेल बद्री सिंह चौहान राजेश पटेल युद्धवीर सिंह पटेल के नामों की चर्चा जोरशोर से चल रही है। उदयपुरा में भाजपा ने तो अपने पत्ते खोल दिए। लेकिन कांग्रेस के लिए दोनों विधानसभाओं में प्रत्याशी का चयन में मशक्कत का काम हो गया है। दोनों सीटों पर दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी का दबदबा है।

जातीय समीकरण बड़ी चुनौती....

भोजपुर और उदयपुरा विधानसभा में प्रत्याशी चयन का सबसे पहला मापदंड जातीय समीकरणों को साधना है। भाजपा ने उदयपुरा से नरेंद्र शिवाजी पटेल को प्रत्याशी बनाकर उदयपुरा और भोजपुर में किरार जाति को साध लिया है। यहां से वर्तमान कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल गडरवास, जो पुरविया समाज से हैं। ऐसे में इस समाज को साधने के लिए टिकट पर इनका दावा फिर से मजबूत होता है।

वैसे भी उदयपुरा विधानसभा की चुनावी राजनीति भोजपुर से गलबहियां करते हुए चलती है। इसका कारण कि भोजपुर में किरार और पुरविया समाज के वोट प्रभावी संख्या में हैं। ऐसे में उदयपुरा से वर्तमान विधायक देवेंद्र पटेल और भोजपुर से पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल का नाम प्रमुखता से सामने आता है। हालांकि इसमें सुरेश पचौरी को संतुष्ट करना मुश्किल होगा। क्योंकि देवेंद्र पटेल और राजकुमार पटेल दोनों ही दिग्विजय सिंह के समर्थकों में गिने जाते हैं,।जबकि भोजपुर विस सुरेश पचौरी का ग्रह जिला वाला क्षेत्र है। वे खुद पिछले दो विस चुनाव लड़ चुके हैं। करारी हार भी मिली थी।हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस से एक और नाम पूर्व विधायक राजेश पटेल का सामने आ रहा है। पटेल पुरविया समाज से हैं। खास बात यह भी कि राजकुमार पटेल इन दोनों ही विधानसभाओं से दावेदार माने जा रहे हैं। इन दोनों विधानसभाओं में कांग्रेस से तीन दावेदारों में से चयन होगा। हालांकि बद्रीसिंह चौहान का नाम चर्चा में है। वहीं भोजपुर में भी बीजेपी में प्रत्याशी के बदलाव की चर्चा भी है, लेकिन इसकी संभावना कम ही है। विधायक सुरेंद्र पटवा यहां से सशक्त दावेदार हैं, लेकिन राजेंद्र अग्रवाल, जयप्रकाश शर्मा के नामों की भी चर्चा है।

सिलवानी में मुकाबला तय....

यदि कोई बड़ा उलटफेर न हो तो सिलवानी विस में अभी तक की राजनीतिक परिस्थिति के अनुसार मुकाबला पुराने प्रतिद्वंदी भाजपा के रामपाल सिंह राजपूत और कांग्रेस के देवेंद्र पटेल के बीच ही होना तय माना जा रहा है। इसका बड़ा कारण यह भी कि यहां से दोनो ही दलों से कोई दूसरा दावेदार भी नजर नहीं आ रहा है। यहां भाजपा की राह में कोई कांटा है तो आदिवासी मतदाता हैं। जिनकी संख्या लगभग 27 हजार है। पिछले चुनाव में आदिवासी नेता नीलमणि शाह ने निर्दलीय चुनाव लडकऱ आदिवासियों की ताकत दिखाई थी। जिन्हें लगभग 18 हजार वोट मिले थे।कांग्रेस पार्टी ने बाजी मार ते हुए देवेंद्र पटेल बेगमगंज को प्रत्याशी बनाया है।भाजपा से उम्मीदवार अभी तक तय नहीं किया है।ऐसी भी चर्चा आम है कि भाजपा से रामपाल सिंह राजपूत के नाम पर मुहर तय है।एक बार फिर से सिलवानी सीट पर मुकाबला कांटे का होना लगभग तय माना जा रहा है।

साँची अजा सीट से भाजपा प्रत्याशी घोषित नहीं... पार्टी नया चेहरे पर दांव खेल सकती है

जिले की हाई प्रोफाइल सीट साँची अजा हाई प्रोफाइल सीट बन चुकी है।आखिर भाजपा खेमे में क्या बात है 2 प्रत्याशियों की सूचियां जारी होने के बाद भी साँची सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।राजनीति के गलियारे में ऐसी जनचर्चा चल रही है।साँची सीट से किसी नये जिताऊ चेहरे पर भरोसा कर सकती है।बीजेपी से स्वास्थ्य मंत्री व विधायक डॉ प्रभुराम चौधरी का नाम प्रमुखता से चल रहा है।केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के समर्थक होने के नाते पिछले विधानसभा उपचुनाव को उन्होंने 64 हजार मतों से धमाकेदार जीत हासिल कर अपने विरोधियों का मुंह बंद कर दिया था।बल्कि जीत का नया कीर्तिमान बनाने में सफल रहे थे डॉ प्रभुराम चौधरी।बीजेपी में नये चेहरों मुदित शेजवार, युवा समाजसेवी मनोहर मेहर धनोरा के नाम जिताऊ चेहरों में शामिल है।चर्चा तो ऐसी भी चल रही है कि पार्टी के बड़े नेता फेरबदल कर नये चेहरे पर भी दांव खेल सकते हैं।

सांची में कांग्रेस अंधेरे में....एक अनार सौ बीमार की बनी स्थिति

यहां भी कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो सांची विधानसभा से डॉ. प्रभुराम चौधरी ही भाजपा के प्रत्याशी होंगे। लेकिन कांग्रेस के लिए प्रत्याशी चयन अंधेरे में तीर चलाने जैसा हो गया है।साँची सीट पर कांग्रेस में डेढ़ दर्जन दावेदार टिकट के लिए कतार में है।डॉ प्रभुराम चौधरी के दलबदल के बाद 

सिंधिया के साथ भाजपा में आने के बाद से सांची विधानसभा में कांग्रेस के पास अब प्रत्याशी का टोटा हो गया है। उपचुनाव में मदन चौधरी को चुनाव लड़ाकर देख लिया गया है। बताया जाता है कि अब जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके पास राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में पकड़ कमजोर है। समजसेवी कांग्रेस नेता डॉ. जीसी गौतम, ठेकेदार राजेश अहिरवार,रुपेश तंतवार, प्रभात चावला, संदीप मालवीय डॉ शैलेंद्र कुमार झारिया, सुनील कुमार मालवीय गैरतगंज छोटे लाल सभरवाल के नाम चर्चा में हैं।