सिलवानी, गैरतगंज की आदिवासी बाहुल्य गांवों की महिलाओं ने पेड़ों को बांधी राखी, बोलीं...ये ही हमारे भाई

सिलवानी, गैरतगंज की आदिवासी बाहुल्य गांवों की महिलाओं ने पेड़ों को बांधी राखी, बोलीं...ये ही हमारे भाई

रायसेन।हर साल की तरह इस साल भी तहसील गैरतगंज सिलवानी बेगमगंज के आदिवासी बाहुल्य गांव की महिलाओं ने रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य जंगल के हरेभरे पेड़ों में रक्षासूत्र बांधकर बोलीं-यही हैं हमारे भाई।

महिलाओं ने लगाए आरोप ....माफियाओं ने काट दिए जंगल के हरेभरे पेड़

तहसील गैरतगंज के ग्राम हैदरी, खेरखेड़ी गुफा, खमरिया गढ़ी जामनपानी, पिपलपानी पटी बंधान बाँसदेही खेड़ा क्षेत्र के आदिवासी गांव की महिलाओं बैजंती बाई शकुन बाई रामवती देवी फूलवती ने रक्षाबंधन का पर्व पेड़-पौधों को राखी बांधकर मनाया। पेड़-पौधों को राखी बांधकर महिलाओं ने उनकी रक्षा का संकल्प भी लिया और आदिवासी समुदाय के लोगों से इन बहनों ने पेड़ों को बचाने का आह्वान भी किया। इसी तरह तहसील सिलवानी के प्रतापगढ,सिलारी, फुलमार,रानीपुरा की रामकली, रतीबाई, प्रेमरानी सल्लाम,सुनीता देवी सेसाम,सुल्तानगंज तहसील बेगमगंज के बम्होरी टीटोर खमरियाकी फुलिया बाई रतन बाई शाह आदि महिलाओं ने कहा कि पेड़ ही हमें शुद्ध हवा देते हैं, जिससे हमारा जीवन बचा हुआ है।

छलका महिलाओं का दर्द....

आदिवासी समाज की महिलाओं का दर्द जंगल में खड़े पेड़ों की बेरहमी से कटाई पर उस समय छलक उठा जब वह रक्षा सूत्र बंधने जंगलों में पहुंची।पेड़ ही हमारी रक्षा करते हैं, इसलिए पेड़ भी हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लकड़ी माफिया जंगलों की कटाई कर रहे हैं ।जबकि कई बार आरोप हम पर लगा दिए जाते हैं। सैकड़ों सालों से आदिवासी और पेड़ एक साथ रह रहे हैं। इतने सालों से आदिवासी असुरक्षित थे और न ही पेड़।लेकिन कुछ सालों से कुछ लकड़ी माफियाओं ने पेड़ काटे।

कोरोना में समझ आई ऑक्सीजन की कीमत ....

इन महिलाओं का कहना था कि कोरोना के समय ऑक्सीजन की कीमत क्या होती है, यह लोगों को समझ में आया। करोड़ों रुपए लोगों के पास थे ।लेकिन ऑक्सीजन की कमी में लाखों लोगों की जान चली गई। लकड़ी माफिया पैसे कमाने के चक्कर में हमें जीवन देने वाले पेड़ों को काटते जा रहे हैं।