खाद विभाग की अनदेखी कहे या मिली भगत संज्ञान में आने के बाद भी नही दिखी कार्यवाही।

खाद विभाग के ज़िम्मेदार अधिकारियों को फोन किया कॉल तक उठाना उचित नही समझा।

मामले को ज़िम्मेदार अधिकारियों को व्हाट्सएप के ज़रिए संज्ञान में लाया गया तो उसके बाद भी नगर में कार्यवाही नही दिखी।

जी हां हम बात कर रहे है रायसेन नगर में महामाया चोक पर शुभम स्वीट्स की जहाँ एक गिरहाक को लगभग 6 माह पुराना एक्सपायर नमकीन का पैकेट पकड़ा दिया जब वह घर लेकर पहुँचा तो उसने देखा इस पैकेट की अंतिम तिथि तो 6 माह पहले ही समाप्त हो चुकी है गिरहाक तुरंत ही उस पैकेट को लेकर शुभम स्वीट्स पर पहुंचा और दुकानदार खूब खरी खोटी सुनाते हुए उस पर अपना सारा गुस्सा निकाल दिया वही गिरहाक का कहना है 15 दिन पहले भी इन्होंने एक्सपायरी डेट का सामान दिया था तब भी इन्हें समझाया था और आज फिर से इनके द्वारा एक्सपायरी डेट का सामान देदिया गया।

वही जब इस बात को जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाना चाहा तो ज़िम्मेदार अधिकारियों ने फोन तक उठाना उचित नही समझा वही जब ज़िम्मेदार अधिकारियों को व्हाट्सएप के ज़रिए मामले को संज्ञान में लाया गया तो न तो उन्होंने कॉल रिटन किया और न ही नगर में ज़िम्मेदार अधिकारियों की कार्यवाही देखने को मिली अब इससे आप ही अंदाजा लगा सकते है कि खाद विभाग अपने कार्य को किस तरह अंजाम देता है।

वही खाने पीने की वस्तुओं का उत्पादन करने वाले उत्पादक खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। पैसा कमाने के चक्कर में वह जनता की सेहत से खिलवाड़ करने में भी नहीं हिचक रहे। इसी का उदाहरण है नगर में बिना मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट अंकित किए बिक रही खानी पीने की वस्तुएं। खाद्य विभाग भी अपनी आंखें मूंदे हुए सब देख रहा है लेकिन इन उत्पादकों पर कार्रवाई नहीं कर रहा। इसमें सबसे अधिक संख्या ब्रेड, बन, फ्रूट केक और अन्य बेकरी से संबंधित चीजें की है। इनमें कई ऐसे बड़े ब्रांड भी शामिल है जिन्हे राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार तक से सम्मानित किया जा चुका है। अब ग्राहक के सामने सही या खराब वस्तु होने की पहचान के लिए लिए तिथि का सहारा नहीं है। अब तो ग्राहक को बस देखकर ही अंदाजा लगाना होगा कि वस्तु खाने लायक है या नहीं।