तहसीलदार, एसडीएम कार्यालय की कुर्सी से राजस्व अधिकारी गायब, जनता परेशान,जिम्मेदार अधिकारी मंत्री वीआईपीओं की अर्दली में व्यस्त

तहसीलदार, एसडीएम कार्यालय की कुर्सी से राजस्व अधिकारी गायब, जनता परेशान,जिम्मेदार अधिकारी  मंत्री वीआईपीओं की अर्दली में व्यस्त

रायसेन।तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय में इन दिनों भर्राशाही का आलम है।जिससे जरूरी कामकाज कराने आने वाले दफ्तरों में भटकते रहते हैं।कुर्सियों से अक्सर राजस्व अधिकारी घण्टों गायब रहते हैं।पता चला है कि जिला मुख्यालय पर आएदिन आने वाले मंत्रियों, वीआईपीओं की अर्दली में उक्त दोनों अधिकारी लगे रहते हैं।ऐसी स्थिति में तहसीलदार नरेश सिंह राजपूत, एसडीएम मुकेश सिंह रायसेन कुर्सी पर बैठकर बजाय लोगों किसानों के कामकाज निपटाने के अर्दली में कुछ ज्यादा ही व्यस्त नजर आते हैं।तहसील कार्यालय रायसेन में कामकाज कराने के लिए आए पूर्व जनपद सदस्य पर्वत सिंह धानक, मोहम्मद सलीम खान, किसान परसराम दांगी, वीर सिंह लाजबन्ति देवी कुसुम बाई नन्दनी रैकवार ने बताया कि आज मैं यहां जरूरी कार्य कराने आए थे।लेकिन कुर्सी से तहसीलदार नरेश सिंह राजपूत गायब मिले।बाद में जानकारी मिली कि तहसीलदार राजपूत दफ्तर के पिछले कमरे की कुर्सी पर दलालों से बातचीत करते नजर आए।उधर लोग कामकाज के लिए भटकते रहे।इसी प्रकार बुधवार को दोपहर 2 बजे और शाम साढ़े 4 बजे कुर्सी से गायब मिले।लोगों का कहना है कि जब राजस्व अधिकारी ही नदारत रहते हैं तो लोगों के कामकाज कैसे निपटेंगे.....।

तहसीलदार कार्यालय परिसर बना दलालों का अड्डा......

तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय में दलालों का बोलबाला है।लेखक एवं दस्तावेज तो लायसेंस होल्डर हैं।लेकिन बताया जाता है कि बगैर लायसेंस के कई दलाल सक्रीय रहते हैं जो कमाई की लालच में एसडीएम कार्यालय तहसील कार्यालय के बाबुओं राजस्व अफसरों से सेटिंग कर जुगाड़ से काम निपटाते दिखाई दिए।हालांकि यहां भ्र्ष्टाचार पहले जमकर फलफूल रहा था।तहसीलदार रायसेन का रीडर खुद लोकायुक्त पुलिस ने डेढ़ लाख रुपये की घूस लेते पकड़ा गया था।इसके बाद कलेक्टर अरविंद कुमार दुबे ने यहां से दर्जनों बाबुओं की दूसरी जगह रवानगी डाल दी थी।जिससे कुछ हद तक सरेआम रिश्वतखोरी,भ्र्ष्टाचार पर रोक लगी थी।लेकिन पता चला है कि उक्त दोनों दफ्तरों में भ्र्ष्टाचार चरम सीमा पर है।लेखक एवं दस्तावेज यूनियन ने इन दलालों फर्जी लोगों की दलाली प्रथा पर सख्ती से रोक लगाए जाने की मांग कलेक्टर अरविंद दुबे से की है।

इनका कहना है.....

कई मर्तबा इमरजेंसी में वीआईपी ड्यूटी में जाना पड़ता हैं।इसीलिए कुर्सी छोड़कर जाना होता है।लेकिन फिर भी लोगों के कामकाज प्राथमिकता से निपटाए जाते हैं।जनता के आरोप बेबुनियाद निराधार हैं। मुकेश सिंह एसडीएम रायसेन